Wednesday, 1 May 2013


Bachpan

bachpan ki wo kahaniya,
jo sunati thi dadi naniya,
sun ke un kahaniyo ko,
kho jate the aisi duniya me,
jinme hote the raja raniya….
kitni achi thi wo duniya,
jisme the school, ghar aur phoolo wali bagiya,
subah school ke liye rona,
dopahar me dhoop se bachne ke liye sona,
sham ko dosto ke sath park me khelna,
raat ko mummy ki dant sunke homewokr karna….
ab kesi duniya me agaye..
jo lagti har pal nayi..
ab to bas ek bhagti hui si jindagi hai
aur na khatam hone wali pareshaniya

Tuesday, 30 April 2013

दर्द पे हंसी !!!!!
५ साल तक अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म के बाद पीडिता की रिपोर्ट पर पुलिस के अधिकारी का हँसना तो  ये ही साबित करता है की पुलिस का डर सिर्फ आम जनता में रह गया है अपराधियों में नही।  जब कानून के रक्षक ही जनता के लिए भक्षक बन जायेंगे तो पुलिस और अपराधियों में क्या फर्क रह जाएगा। हर रोज दुष्कर्म हो रहें हैं और हमारी पुलिस सिर्फ प्रदर्शन कारियों को रोकने का काम करती हैं। अपराध या अपराधियों को नही। इन ५ महीनों में दुष्कर्म के कितने मामले सामने आये और अब तक आ रहे है। बस एक शोर होता हैं और फिर शांति जैसे की कुछ हुआ ही नहीं हो।

Thursday, 4 April 2013

"पहले आप पहले आप "

जब कभी हमारे यहाँ लाइट जाती है तो ये अलिखित परंपरा है कि  देखो सबकी लाइट गई है या अपनी ही सबकी गई है तो ठीक है और अपनी है तो शिकायत दर्ज करायी जाए । अब ऐसा ही एक और क़िस्सा सुनिए
सड़क पर गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क, पता नहीं चलता । जिस दिन कोई गिर जाये या कोई दुर्घटना हो जाये तो हाहाकार मच जाता हैं  की "कोई इन पर ध्यान क्यों नहीं देता, सरकार क्या कर रही है । "
आप ही बताइए की सरकार को थोड़ी न वहां से गुजरना है यहाँ तो हमारा ही काम रोज पड़ने वाला है तो पहल भी हम ही को करनी होगी । सरकार तो तब करेगी जब सरकार  की नजर वहां तक पहुचेगी । और नज़र वहां तक पहुंचे इसके लिए हमे यानि की आज के यूथ को ज़िम्मेदारी लेनी पड़ेगी इन सब को सुधारने की ..इंतज़ार मत कीजिये किसी अपने को चोट पहुँचने की।
कहीं पहले आप पहले आप में गाड़ी ही न छूट जाये। 

Monday, 1 April 2013

आगाज़ आवाज़ का

खुद को व्यक्त करने का ये मंच मेरे लिए नया है,पर हर नयी चीज़ की शुरुआत कहीं न कहीं से तो होती ही है।तो आज से ही क्यूँ नहीं
कई बार मन में बहुत कुछ आता है,आस पास हो रही घटनाओं पर "मैं " क्या सोचती हूँ ये इस दुनिया तक पहुँचाना भी तो ज़रूरी है।
आज से  है मेरी सोच को मिला है एक नया आयाम.. .. :)