जब कभी हमारे यहाँ लाइट जाती है तो ये अलिखित परंपरा है कि देखो सबकी लाइट गई है या अपनी ही सबकी गई है तो ठीक है और अपनी है तो शिकायत दर्ज करायी जाए । अब ऐसा ही एक और क़िस्सा सुनिए
सड़क पर गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क, पता नहीं चलता । जिस दिन कोई गिर जाये या कोई दुर्घटना हो जाये तो हाहाकार मच जाता हैं की "कोई इन पर ध्यान क्यों नहीं देता, सरकार क्या कर रही है । "
आप ही बताइए की सरकार को थोड़ी न वहां से गुजरना है यहाँ तो हमारा ही काम रोज पड़ने वाला है तो पहल भी हम ही को करनी होगी । सरकार तो तब करेगी जब सरकार की नजर वहां तक पहुचेगी । और नज़र वहां तक पहुंचे इसके लिए हमे यानि की आज के यूथ को ज़िम्मेदारी लेनी पड़ेगी इन सब को सुधारने की ..इंतज़ार मत कीजिये किसी अपने को चोट पहुँचने की।
कहीं पहले आप पहले आप में गाड़ी ही न छूट जाये।
सड़क पर गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क, पता नहीं चलता । जिस दिन कोई गिर जाये या कोई दुर्घटना हो जाये तो हाहाकार मच जाता हैं की "कोई इन पर ध्यान क्यों नहीं देता, सरकार क्या कर रही है । "
आप ही बताइए की सरकार को थोड़ी न वहां से गुजरना है यहाँ तो हमारा ही काम रोज पड़ने वाला है तो पहल भी हम ही को करनी होगी । सरकार तो तब करेगी जब सरकार की नजर वहां तक पहुचेगी । और नज़र वहां तक पहुंचे इसके लिए हमे यानि की आज के यूथ को ज़िम्मेदारी लेनी पड़ेगी इन सब को सुधारने की ..इंतज़ार मत कीजिये किसी अपने को चोट पहुँचने की।
कहीं पहले आप पहले आप में गाड़ी ही न छूट जाये।
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